नई दिल्ली। दिल्ली के साकेत कोर्ट कॉम्प्लेक्स में शुक्रवार को एक कोर्ट स्टाफ सदस्य हरीश सिंह महार (35) ने पांचवीं मंज़िल से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट बरामद किया है, जिसमें हरीश ने बताया कि काम का अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव उनकी मौत की वजह है।
सुसाइड नोट में हरीश ने लिखा कि वे लंबे समय से काम के दबाव और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। उन्होंने साफ किया कि उनकी मौत के लिए किसी और को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
पुलिस के अनुसार, हरीश साकेत कोर्ट में अहलमद के रूप में कार्यरत थे। शुक्रवार सुबह उन्होंने कोर्ट कॉम्प्लेक्स की पांचवीं मंज़िल से कूदकर खुदकुशी कर ली। उनके शव को तुरंत पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
घटना के बाद कोर्ट स्टाफ और वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया। स्टाफ ने कोर्ट परिसर में जमकर नारे लगाए और न्यायिक अधिकारियों से काम के बोझ और मानसिक दबाव को कम करने की मांग की। विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे कर्मचारियों की परेशानियों का संकेत है।
साकेत कोर्ट के स्टाफ एसोसिएशन अध्यक्ष दीपक भारद्वाज ने कहा, “यह घटना सिर्फ दुखद नहीं, बल्कि चेतावनी है। कोर्ट स्टाफ की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए।”
वहीं, डीसीपी (साउथ) अंकित चौहान ने बताया कि सुसाइड नोट में हरीश ने किसी के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया है। पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और सभी सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं।
इस दुखद घटना ने न्यायपालिका में कर्मचारियों की मानसिक स्वास्थ्य और कार्य दबाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोर्ट कर्मचारियों के लिए सहायता प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन की व्यवस्था तुरंत की जानी चाहिए।