खस्ताहाल हॉस्टल, लाचार छात्र: पत्रकारिता विश्वविद्यालय में सुविधाओं की पोल खुली…

रायपुर। राज्य के प्रमुख कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के हॉस्टल की हालत इतनी बदतर हो गई है कि छात्र उसे खड़ंहर करार दे रहे हैं। यहाँ विद्यार्थी न केवल टूटे-फूटे बेड में सोते हैं, बल्कि पीने के लिए भी साफ पानी तक नहीं मिल पा रहा है, हॉस्टल में लगाये गए वॉटर फिल्टर का पानी पीने योग्य नहीं है।

यह गंभीर समस्या अब वहीं के छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है, जिन्होंने प्रशासन से बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं पाया।

हॉस्टल के कमरे की हालत बेहद खराब है। छात्रों ने बताया कि उनके लिए दिए गए बिस्तर में से कई के पैर टूटे हुए हैं, कुछ तो जर्जर स्थिति में हैं, जिससे वे उन्हें ठीक ढंग से उपयोग नहीं कर पा रहे।

बिस्तर टूटे होने के कारण कई छात्र मजबूरी में फर्श पर पॉलिथीन फैलाकर सोने को मजबूर हैं। इसके अलावा कमरे की दीवारों में दरारें और खिड़कियों के काँच टूटे होने से ठंड और धूल-बूँदों का सामना करना पड़ता है। छात्रों का कहना है कि यह स्थिति न केवल सुविधाहीन है, बल्कि उनकी पढ़ाई और सेहत पर भी बुरा असर डाल रही है।

हॉस्टल प्रबंधन द्वारा लगाए गए पानी के फिल्टर के बारे में छात्रों ने कहा कि वह पीने योग्य जल नहीं दे रहा। छात्रों ने बताया कि फिल्टर का पानी पीने पर कई बार पेट संबंधी समस्या भी हुई है, लेकिन प्रशासन ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया। कुछ छात्रों ने बताया कि उन्हें मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदकर पीना पड़ता है, जो आर्थिक रूप से कठिनाई भी पैदा कर रहा है।

छात्रों का यह भी आरोप है कि नौरिसिंग के अलावा अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी पर्याप्त नहीं हैं। हॉस्टल समीप के किचन और डाइनिंग एरिया की स्थिति भी ठीक नहीं है, जिससे उन्हें स्वच्छ भोजन और आराम से बैठकर खाने की सुविधा नहीं मिल पाती।

छात्रों के अनुसार, हॉस्टल का रख-रखाव लम्बे समय से उचित रूप से नहीं किया गया है, जिससे आज की हालत खराब हो चुकी है।

हॉस्टल में रह रहे छात्रों ने बताया कि वे कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से समस्या बताने के प्रयास कर चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि कई बार लिखित शिकायत आने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।

एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमें सोने के लिए आरामदायक बेड नहीं मिल रहा, पानी साफ नहीं है, फिर भी हम मजबूरी में यहाँ रह रहे हैं। अगर इन्हें सुधारने की दिशा में कार्य नहीं किया गया, तो हमें कहीं और जाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

केंद्रित समस्याएँ एक नजर में कुछ इस तरह है, टूटे-फूटे बेड और खराब कमरे, पेयजल फिल्टर खराब, पानी पीने योग्य नहीं,
साफ-सफाई की कमी, खराब भोजन एवं सुविधाओं का अभाव, प्रशासन की सुस्ती और अनदेखी।

पत्राचार विश्वविद्यालय प्रशासन से जब स्थिति पर प्रतिक्रिया माँगी गई, तो उन्होंने कहा कि हॉस्टल सुधार कार्य की योजना और बजट तैयार किया जा रहा है और जल्द ही नयी व्यवस्था के लिए कार्य किया जाएगा।
हालाँकि छात्रों का कहना है कि यह केवल आश्वासन रहा है कोई तात्कालिक सुधार नहीं दिख रहा।

हाल ही में देश के कई शैक्षणिक संस्थानों में हॉस्टल सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आई हैं: राजस्थान में छात्राओं ने खराब भोजन और सुविधाओं पर प्रदर्शन किया है।  कई संस्थानों के हॉस्टल में दरारें, गिरती छत और पानी की समस्याएँ छात्र प्रदर्शन का कारण बनी हैं। ये घटनाएं सामान्य बात नहीं हैं, बल्कि देश भर में हॉस्टल सुविधाओं के बारे में छात्रों की लगातार बढ़ती शिकायतों का हिस्सा बनी हुई हैं।

बहरहाल यह तो तय है कि पत्रकारिता विश्वविद्यालय के हॉस्टल की खस्ता हालत में छात्रों का जीवन प्रभावित हो रहा है। टूटे-फूटे बेड, दूषित पानी और सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियाँ छात्रों के लिए रोज-मर्रा की समस्या बन चुकी हैं। इन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इंतज़ार किया जा रहा है कि प्रशासन तुरंत सुधार कार्य शुरू करे ताकि छात्रों को एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

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