बस्तर। नए साल 2026 के मौके पर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित विश्वप्रसिद्ध कुटुमसर गुफा पर्यटकों से गुलजार रही। कांगेर वैली नेशनल पार्क में देश-विदेश से आए सैलानियों ने प्रकृति की गोद में स्थित इस रहस्यमयी गुफा की अलौकिक दुनिया का करीब से अनुभव किया।
कुटुमसर गुफा एशिया की सबसे बड़ी और रहस्यमयी प्राकृतिक गुफाओं में गिनी जाती है। यह गुफा जगदलपुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर कांगेर घाटी नेशनल पार्क में स्थित है। गुफा की कुल लंबाई करीब 4500 फीट है, जबकि इसकी गहराई 60 से 120 फीट तक मानी जाती है। गुफा के अंदर चूना पत्थर से बनी अनोखी आकृतियाँ, प्राकृतिक खंभे और छत से टपकते जलकण इसे और भी आकर्षक बनाते हैं।
नए साल के अवसर पर बड़ी संख्या में पर्यटक कुटुमसर गुफा पहुंचे। सैलानियों ने इस जगह को “स्वर्ग जैसा अनुभव” बताया। पर्यटक न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते दिखे, बल्कि गुफा के भीतर फैली रहस्यमयी और रोमांचक दुनिया को देखने को लेकर खासा उत्साहित नजर आए।
कुटुमसर गुफा अंधी मछलियों (कप्पी ओला शंकराई) के लिए भी प्रसिद्ध है। ये मछलियाँ गुफा के भीतर मौजूद अंधेरे जलाशयों में पाई जाती हैं और इन्हें देखने के लिए पर्यटक खास तौर पर आकर्षित होते हैं। इन अंधी मछलियों की खोज 1950 के दशक में डॉ. शंकर तिवारी द्वारा की गई थी। पहले इस गुफा को गोपनसर (छिपी हुई गुफा) के नाम से जाना जाता था।
कुटुमसर गुफा मानसून के दौरान जून से अक्टूबर तक सुरक्षा कारणों से बंद रहती है, लेकिन फिलहाल पर्यटकों के लिए खुली हुई है। गुफा भ्रमण के दौरान टॉर्च साथ रखना अनिवार्य है, क्योंकि अंदर पूरी तरह अंधेरा रहता है। वहीं, वाहनों की पार्किंग और प्रवेश व्यवस्था कांगेर वैली नेशनल पार्क के नियमों के अनुसार की जाती है।
नए साल पर बढ़ी पर्यटकों की संख्या से बस्तर के पर्यटन को नया संबल मिला है। प्रशासन और वन विभाग इसे क्षेत्रीय पर्यटन के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।