बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में गुरु घासीदास जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब समारोह में RSS से जुड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी को लेकर सतनामी समाज के युवाओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। विरोध इतना बढ़ गया कि कार्यक्रम स्थल पर तनावपूर्ण माहौल और हंगामा देखने को मिला।
यह पूरा घटनाक्रम जरहाभाठा क्षेत्र की मिनी बस्ती स्थित महंत बाड़ा में आयोजित गुरु घासीदास जयंती समारोह के दौरान सामने आया। 18 दिसंबर को प्रदेश सहित शहर में गुरु घासीदास जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही थी। इस दौरान जैतखंभ पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे।
महंत बाड़ा के राज महंत डॉ. बसंत अंचल ने कार्यक्रम में RSS के पदाधिकारियों को भी आमंत्रित किया था। इनमें विभाग संघ चालक डॉ. राजकुमार सच्च देव, जिला संघ चालक रामधन रजक, नगर संघ चालक प्रदीप शर्मा सहित RSS के अन्य कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे।
जैसे ही RSS पदाधिकारी समारोह में पहुंचे, सतनामी समाज के कुछ युवा भड़क गए। युवाओं ने सामाजिक कार्यक्रम में RSS की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए आपत्ति जताई और नारेबाजी शुरू कर दी। युवाओं का कहना था कि गुरु घासीदास जयंती समाज का पारिवारिक आयोजन है, जिसमें RSS का कोई दखल नहीं होना चाहिए।
विरोध बढ़ता देख राज महंत, डॉ. बसंत अंचल ने मौके पर पहुंचकर युवाओं को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास के संदेश “मनखे मनखे एक समान” पर आधारित हैं और यह व्यवहार बाबा के आदर्शों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि इस तरह का आचरण अनुचित है।
लेकिन जितेंद्र बंजारे सहित अन्य युवाओं ने उनकी बात नहीं मानी और विरोध और तेज हो गया। युवाओं ने RSS के खिलाफ नारे लगाए और पदाधिकारियों से कहा कि वे “अपने घर में गुरु घासीदास जयंती मनाएं”। युवाओं का आरोप था कि यह उनका निजी आयोजन है, जिसमें RSS शामिल नहीं हो सकता।
RSS पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे केवल पूजा-अर्चना के लिए आए थे और किसी तरह का विवाद खड़ा करने का उनका कोई उद्देश्य नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मौजूदगी पर आपत्ति है तो वे लौटने को तैयार हैं।
पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कार्यक्रम के दौरान हुई नारेबाजी और हंगामा साफ दिखाई देता है। घटना के बाद राज महंत डॉ. बसंत अंचल ने इस पूरे मामले को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है।
RSS पदाधिकारियों की मौजूदगी और युवाओं के विरोध के चलते समारोह स्थल पर काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। हालांकि, किसी तरह की हिंसक घटना की सूचना नहीं है, लेकिन यह मामला अब सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।