डिजिटल सुरक्षा, कड़ी निगरानी और सख्त कानूनों से कई देशों ने खत्म की परीक्षा धांधली
नई दिल्ली। भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। हालिया NEET विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा पर फिर सवाल उठे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की मजबूत व्यवस्था से भारत को सीख लेने की जरूरत है, जहां पेपर लीक की घटनाएं बेहद दुर्लभ हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और चीन में परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल निगरानी, एन्क्रिप्टेड डेटा सिस्टम और सीमित मानव हस्तक्षेप पर आधारित होती है। प्रश्नपत्रों तक केवल चुनिंदा अधिकारियों की पहुंच होती है और हर गतिविधि की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाती है। कई देशों में परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, AI निगरानी और सिग्नल जैमर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल आम हो चुका है।
भारत में हाल के वर्षों में कई बड़ी परीक्षाएं पेपर लीक विवादों में घिरी हैं। NEET-UG 2026 परीक्षा को कथित अनियमितताओं के बाद रद्द करना पड़ा, जबकि जांच एजेंसियां मल्टी-स्टेट नेटवर्क की जांच कर रही हैं। इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सख्त कानून बनाना काफी नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है। प्रश्नपत्र वितरण की डिजिटल व्यवस्था, GPS ट्रैकिंग, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और तेज कानूनी कार्रवाई जैसे कदम भारत में पेपर लीक रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।